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सोमवार, 20 अप्रैल 2020

Roshi: बच्चों की चहचहात ,शोर और खिलखिलाहटजो हो गयी थी ...

Roshi:

बच्चों की चहचहात ,शोर और खिलखिलाहट
जो हो गयी थी ...
: बच्चों की चहचहात ,शोर और खिलखिलाहट जो हो गयी थी गुम कहीं ,लौट आयी वापिस उनके अधरों में बुजुर्ग जिनकी आँखें थी पथराई तक्ते बेटा बहू का ...

रविवार, 19 अप्रैल 2020

Roshi: बच्चों की चहचहात ,शोर और खिलखिलाहटजो हो गयी थी ...

Roshi:

बच्चों की चहचहात ,शोर और खिलखिलाहट
जो हो गयी थी ...
: बच्चों की चहचहात ,शोर और खिलखिलाहट जो हो गयी थी गुम कहीं ,लौट आयी वापिस उनके अधरों में बुजुर्ग जिनकी आँखें थी पथराई तक्ते बेटा बहू का ...


बच्चों की चहचहात ,शोर और खिलखिलाहट
जो हो गयी थी गुम कहीं ,लौट आयी वापिस उनके अधरों में
बुजुर्ग जिनकी आँखें थी पथराई तक्ते बेटा बहू का पाने को साथ
अंदर -बाहर की आपाधापी में भागा पड़ा था पूरा परिवार
सिमटते ,पारिवारिक मूल्यों ने पाया पुनर्जीवन ,जी उठे सबका साथ पाकर
माँ-बाप तरसते थे दो मीठे बोलों को ,एक मुलाक़ात को अपनी वीरान कोठरी में
कम से कम अब सुनते हैं बच्चों ,बेटा बहू की खिलखिलाहट वीराने में
कूक जो खिलाता आया था बेस्वाद खाना ,बच्चे और बुजुर्ग जो थे उनके रहमोकरम पर
आजकल तो बस मम्मी नित नई रेसिपी कर रही है ट्राइ
बच्चे ,बुजुर्ग सब आजकल खा रहे हैं रोज नया फ्राई
जो कभी ख्वाब में भी ना था सोचा ,कोरोना ने हमारे परिवारों को दिखाया दिया वो मौका
पहचानने को अपने परिवार की एहमियत ,बुजुर्ग माँ बाप का प्यार
महसूस करने को बच्चों का मासूम बचपन और समझने को अपना घर संसार

मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

Roshi: कोरोना महामारी पर हुए लोक डाउन ने बदले जीवन के रंग...

Roshi: कोरोना महामारी पर हुए लोक डाउन ने बदले जीवन के रंग...: कोरोना महामारी पर हुए लोक डाउन ने बदले जीवन के रंग ईंट और सीमेंट से बनी चाहरदीवारी बापिस बन गयी घर जिनकी रसोई से उठती सुवासित पकवानों की...
कोरोना महामारी पर हुए लोक डाउन ने बदले जीवन के रंग
ईंट और सीमेंट से बनी चाहरदीवारी बापिस बन गयी घर
जिनकी रसोई से उठती सुवासित पकवानों की खुशबू
जो हो गयी थी गुम कंही,विदेशी अधकचरे ,अधपके व्यंजनों में
आँगन जो रहते थे सूने,हो गए गुलजार ,मानो लगे हैं खिलखिलाने
घर के मर्द जो सिर्फ थे सीमित ऑफिस और व्यवसाए में
दिखने लगी है अब शायद उनको भी स्त्री की एहमियत
खटती रही जो ज़िंदगी भर घर और भीतर समेटने में
नौनिहाल ,बालक, वृद्ध हैं खिल उठे सबके मुखमंडल
मानो छाया है कुछ जादू सम्पूर्ण वायमंडल में
ने ने ने टूटते परिवारों ,रिश्तों ने पाया है कहीं नवजीवन
हमारे पास जो ना था वक़्त कुदरत ने उसको वापिस है लौटाया
बैठो ,समझो ,देखो पहचानो हेर रिश्ते की एहमियत
हमारा घर ,आँगन ,भी कहता है हुमसे बहुत कुछ
कुछ उसको भी सुनने की जरूरत है ,....जागो अब सब

शुक्रवार, 11 अक्तूबर 2019

Roshi: संसारिक मर्यादा का तो बखूबी पालन किया मर्यादा पुरष...

Roshi: संसारिक मर्यादा का तो बखूबी पालन किया मर्यादा पुरष...: संसारिक मर्यादा का तो बखूबी पालन किया मर्यादा पुरषोत्तम ने पित्रधर्म ,माँ का सम्मान बखूबी निभाया था हर आज्ञा को राम ने सौतेली माँ की आज्ञा ...
संसारिक मर्यादा का तो बखूबी पालन किया मर्यादा पुरषोत्तम ने
पित्रधर्म ,माँ का सम्मान बखूबी निभाया था हर आज्ञा को राम ने
सौतेली माँ की आज्ञा को कर शिरोधार्य वन गमन का निर्ड्य लिया था राम ने
पिता का मान रखना तो पुत्र धर्म है ,पर भ्रात-सुता का न किया जरा ध्यान राम ने
कदापि ना विचारा लक्ष्मण की भगिनी कैसे काटेगी घोर वनबास ?
शूलों की मानिद उसको भी प्रतिदिन कटेगा रनिवास
रावण से युद्ध तो नियत विदित था पर उसमें सीता का क्या दोष था?
बलशाली रावण के द्वारा छल से ले जायी गयी वो श्रीलंका
एक -एक पल कैसे काटा उस पीड़ा को लिखना भी है मुश्किल
बापिस आकार भी तो वो गयी थी फिर छली,दूसरे पुरुष से
सुना दिया था निर्ड्य ,त्याग दी गयी थी मर्यादा पुरषोतम से
गर्भावस्था में भेज दी गयी वन में वो आसन्नप्रसवा
पतिधर्म की मर्यादा का पालन क्यौ ना कर सके तुम राम ?
हर युग में अनुत्तरित रेह जाएंगे कुछ सवाल
कभी न दे सकोगे उन प्रश्नों का जवाब तुम राम