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शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

जब मस्तिस्क हो शून्य ,दिमाग भी ना दे साथ
सौंप दे जीवन नैया तब अपनी प्रभु के हाथ
राह हैं वो दिखाते मानुस छोड़ते ना तेरा हाथ
सब होते हैं दरवाज़े बंद ,देतें हैं वो ही नन्ही सी रौशनी की किरन
खाती है जब -जब नैया तेरी हिचकोले ,तो सम्हाले भी प्रभु आकर हौले -हौले
इंसा के अर्जित कर्म ,पुण्य ,पाप जीवन पथ पर बिखेरते हैं जरूर
कंटक हों या हों वो पुष्प ,पर अगर पतवार सौप दी प्रभु को
तो हो जाओ निश्चिन्त ,अब अपना कामवो करता जरूर
हमारे साथ यह ही तो समस्या है सबकी  कि
चाहते सब हैं कि प्रभु कर दे सब ठीक परन्तु उसकी रजा  में है ना यकीन
यकीं करो पूरा और छोड दो सब कुछ उसके ऊपर