शनिवार, 18 जनवरी 2014

बेटियां और धान का पौधा

बेटियां और धान का पौधा ,पाते हैं दोनों एक सी किस्मत
बोई जाती हैं कहीं ,रोपी जाती हैं रही और कंहीं ....
किस्मत होती अच्छी ,मिलती पौधे को उपजाऊ जमीं
खिल उठता ,फल -फूल जाता पाकर उचित देखभाल
बेटियां भी अगर पाती संस्कारी परिवार ,तो दमक उठता उनका रूप
बरना तो कम पानी ,बंजर जमी में जैसे तोड़ देता दम पौधा
बेटियां भी तिल -तिल रोज मरती हैं नए परिवेश में
करनी होती है दिल से दोनों की देखभाल नए माहौल में
थोड़ी सा भी ध्यान दिया नहीं की खिलखिला उठते हैं दोनों
अच्छी फसल धान की भरती है जैसे घर किसान का
वैसे ही भर देती हैं बेटियां ससुराल का आँगन ढेर सी खुशिओं से ......

  जिन्दगी बहुत बेशकीमती है ,उसका भरपूर लुफ्त उठाओ कल का पता नहीं तो आज ही क्योँ ना भरपूर दिल से जी लो जिन्दगी एक जुआ बन कर रह गयी है हर दिन ...