मुखौटे चडे हैं चेहरों पर ,पहचानना है नामुमकिन
गर मुखौटा हटा कर देखो हर चेहरा मुस्कराता दिखेगा यक़ीनन
बड़े से बड़े शूरवीर भी खा गए धोखा असल नक़ल को जानने में
उम्र निकल जाती है तमाम, असलियत की गहराई समझने में
असलियत सामने आते -आते खुद हो जाते तमाम जिन्दगी में
हर
रोज़ कोई नया मुखौटा सामने आ जाता इस जिन्दगी की दौड़ में
--रोशी
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