शनिवार, 4 जुलाई 2015

दिल


दिल जैसी बड़ी अजीब शै है खुदा ने खूब बनाई
जिस्म ,रूह सभी पर है इसका बखूबी कब्ज़ा भाई
यह खुश तो सभी अंगों पर रहती है बाहर खूब छाई
दुखी दिल तो सारी कायनात के सुकूं भी निराधार हैं भाई
आँखों को भी यह कमबख्त वही है दिखता जो खुद देखना चाहें है भाई 
तन के घावों का उपचार तो हकीम -वैध कर देवे
पर दिल की चोटों का नहीं है धरा पर कोई इलाज है भाई
बड़ी कीमती ,बेमिसाल सौगात बक्शी है ईश्वर ने हमको
इस दिल की मुकम्मल देखभाल करो मेरे भाई

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