WATCH

सोमवार, 2 जुलाई 2012

तूफा और साहिल

 कुछ तूफा ,बेचैन हवाएं रुख ही मोड़ देते है साहिल का
जो कश्ती थी बह रही ख़ामोशी से दिशा ही बदल देते हैं 
माझी जो समझा था बस अब सामने ही है बस किनारा 
एक पल मैं ही बदल जाती है उसकी और नैया की तकदीर 
कब और किस किनारे लगे यह ही उसकी तकदीर