अकेले, एकाकी , हैरान, परेशान
घर, परिवार सब है आसपास पर मन है बेचैन
मन है निशब्द, मौन और है मद्विम हैं साँसें
भीड़ से दूर, एकांत, शांत, अकेलापन आता है ना फालतू बातें
है पत्तियों की सरसराहट, झींगुरो की आहट
मन को हैं सब यही कुछ लुभाते, बहलाते
और मै इन सबको अपने बीच में पाकर
हूँ अत्यंत खुश और यही है दिल को भाते
क्यूंकि यह सब साथ ही हैं मेरे जख्मो को सहलाते
फूल, पल्लव, हरियाली यही है मेरा जीवन
नित नव जीवन, यही देता है 'साकेत' का घर आँगन .......
घर, परिवार सब है आसपास पर मन है बेचैन
मन है निशब्द, मौन और है मद्विम हैं साँसें
भीड़ से दूर, एकांत, शांत, अकेलापन आता है ना फालतू बातें
है पत्तियों की सरसराहट, झींगुरो की आहट
मन को हैं सब यही कुछ लुभाते, बहलाते
और मै इन सबको अपने बीच में पाकर
हूँ अत्यंत खुश और यही है दिल को भाते
क्यूंकि यह सब साथ ही हैं मेरे जख्मो को सहलाते
फूल, पल्लव, हरियाली यही है मेरा जीवन
नित नव जीवन, यही देता है 'साकेत' का घर आँगन .......
1 टिप्पणी:
लाजवाब...प्रशंशा के लिए उपयुक्त कद्दावर शब्द कहीं से मिल गए तो दुबारा आता हूँ...अभी
मेरी डिक्शनरी के सारे शब्द तो बौने लग रहे हैं...
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