नव सृजन, नव जीवन , नव आनंद है अपूर्व
कारण है इसके अंतस में समेटे खुश है हम खूब
बालकों का कलरव हैं घर में आँगन खुशियों से पूर्ण
हृदय में है अनेको उमंगें, उत्साह और प्यार सम्पूर्ण
नाती का वो ठुमकना, चलना ,मचलना और इठलाना
कर रहा है वो सबको आनंदित घर -आँगन है गुंजरित.
व्यंजनों की चटपटाहट, बर्तनों की खडखडाहट
रसोई से उडती थी खुशबू और है बच्चो की सुगबुगाहट
मन भरता है कुलाचें अनगिनत और मस्तिस्क है बहुत ही व्यस्त
लगता है जिंदगी यूँ ही चलती रहे, शाश्वत और अनवरत
शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010
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1 टिप्पणी:
वाह पहली बार पढ़ा आपको बहुत अच्छा लगा.
आप बहुत अच्छा लिखती हैं और गहरा भी.
बधाई.
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