आज अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है
समस्त नारी जाति को बेबकूफ़ बनाकर फंसाया जा रहा है
बस एक दिन नारी जाति के नाम करके उसको फसाया जा रहा है
कन्या के गर्भ में आते ही उत्पीड़न शुरू हो जाता है
ज्यादातर का सफ़र तो गर्भ में ही ख़त्म हो जाता है
बाकी को जन्मते ही होती हैं दुशवारियाँ
खीर मक्खन तो खाए भाई और वो देखती रह जातीं हैं बेचारियाँ
बचपन गुजार मायके की देहलीज लांघ पहुंचती ससुराल जब नारियां
माँ से सुना था बचपन से , आई थी मायके में तोहो सिर्फ मेहमान
असली घर तो ससुराल है तुम्हारा जिस घर की होगी तुम शान
सारा गणित है गड़बड़ाया, नारी को कौन सा घर है अपना समझ ना आया
कहीं ना मिलता सुख उसको पिता और पति सबकी उससे आशाएं अपार
99 % महिलाओं की जिंदगी पर भार यही है महिलाओं की ज़िन्दगी का बरसों से सार
आखिर क्यों मनाया जाता है यह महिला दिवस विश्व भर में
जिस दिन महिलाओं को मिले सम्पूर्ण अधिकार प्यार और मान सम्मान घर में
वही उसी दिन होगा असल में महिलाओं का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस वास्तव में ...
2 टिप्पणियां:
सचमुच,जिस दिन नारी को उसका सम्मान वापस मिल जाएगा ,नारी दिवस की सार्थकता उसी दिन सिद्ध होगी !
मन को छू गयी आपकी अभिव्यक्ति !
आभार !
vo sabki hai uska koi nahin yahi to vyathaa hai naari kee .
veerubhai
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