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मंगलवार, 6 सितंबर 2011

मेरे दोस्त तेरे नाम

५० का आंकड़ा कर लिया है तुमने भी पार 
ईश्वर को यूँ ही दया बनी रहे तुम पर अपार 
हम दोनों को शायद इश्वेर ने एक साथ ही दिया होगा आकर 
कई समानताएं कई बातें आती रहीं हैं बार- बार
मै और तुम दोनों यहीं खेले और पले- बढें और सुख पाए 
माँ- पिता की छत्र-छाया और जो सुख चाहा वो सभी पाए 
किस्मत में था एक शहर में रहना साथ दोनों का वो भी निभाएं 
हम दोनों ने ही ईश्वर प्रदत्त, एक- एक होनहार पुत्र रत्न पाए 
माँ भी हम दोनों की जो घर से निकली, दुर्घटनावस् लौट ना पायीं 
पर आज हम दोनों पर ही ईश्वर ने छोड़ी जिम्मेदारिया- जो हम जा रहें हैं निभाए 
मै पापा के पास और तुम्हारे पास पापा देखो है कितनी समानतायें 
ईश्वर नवाजे तुम्हें ढेर सी खुशियाँ, और दूर करे सारी बिप्दायें 
कुदरत ने दी हैं हम दोनों की जिन्दगी में बहुत सी समानतायें 
इन्सान कुछ भी न कर सकता है मंगते है हम यही दुआएं 
जैसे अब तक निभाया है यह रिश्ता वैसे आगे भी हम-तुम निभाएं 
जितनी भी जिन्दगी काटी अच्छी कटी और आगे भी सुंदर सजाएँ ...

3 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर भाव .......

Rakesh Kumar ने कहा…

सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति.
ईश्वर की नियामत हैं सच्चे दोस्त.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

शुभकामनायें।