आज थी मकर संक्रांति और था मांगने वालों का रेला
तभी नज़र पड़ी कोने में खड़ा था एक वृद्ध अकेला
पास बुलाया और पूछा बाबा क्या चाहिये आपको ?
बोला कुछ नहीं बस दुआएं दिए जा रहा था हमको
वृद्ध काया ,पोपला मुंह,शीतल वायु थी फटे वस्त्र उड़ाए जा रही थी
धीमे -धीमे रेंगते रेंगते सड़क पर बस वह घिसटे जा रहा था
कहा हमने बाबा घर से ना निकला करो सड़क पर गिर जाओगे, वह बातें नहीं था सुनता
बोला हम कहाँ निकलना चाहते है बेटा ,कमबक्त ये पेट नहीं मानता
न पत्नी ,न परिवार न ही औलाद है हमारे पास है निपट अकेले
पर क्या करे बेटी घर पर नहीं वैठकर भरता है पेट, चाहिए इसको दो निवाले
निशब्द रह गए थे हम उसका सुंदर जबाब सुनकर
सब कुछ छीनकर भी प्रभु ने दिया उसको सबका प्यार
तभी नज़र पड़ी कोने में खड़ा था एक वृद्ध अकेला
पास बुलाया और पूछा बाबा क्या चाहिये आपको ?
बोला कुछ नहीं बस दुआएं दिए जा रहा था हमको
वृद्ध काया ,पोपला मुंह,शीतल वायु थी फटे वस्त्र उड़ाए जा रही थी
धीमे -धीमे रेंगते रेंगते सड़क पर बस वह घिसटे जा रहा था
कहा हमने बाबा घर से ना निकला करो सड़क पर गिर जाओगे, वह बातें नहीं था सुनता
बोला हम कहाँ निकलना चाहते है बेटा ,कमबक्त ये पेट नहीं मानता
न पत्नी ,न परिवार न ही औलाद है हमारे पास है निपट अकेले
पर क्या करे बेटी घर पर नहीं वैठकर भरता है पेट, चाहिए इसको दो निवाले
निशब्द रह गए थे हम उसका सुंदर जबाब सुनकर
सब कुछ छीनकर भी प्रभु ने दिया उसको सबका प्यार
रोशी अग्रवाल
3 टिप्पणियां:
सार्थक पोस्ट है आपकी | कहीं रिश्ते होते हुआ भी लोग एकाकी रह जाते हैं तो कहीं सारा जहाँ ही अपनासा लगता है |
रिश्तों को मजबूती मिले, घरों में प्रेम बढ़े..
God Bless...
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