पकड़ा था लोगो ने एक चोर को रंगे हाथ अपने हाथों से
कितना मार-मार कर किया था लहूलुहान लातों और घूंसों से
मरंतुल ही लगभग हो चुका था वो इन्सान अपनी सांसो से
उस भीड़ में हर इन्सान ने लगभग हाथ साफ़ कर ही लिए थे
गूँज उठा तभी पुलिस van का सायरन कही दूर से
जरा सबकी नज़र हटी .और हो गयी पकड़ ढीली उस चोर से
उस मुर्दा शरीर में जान पड़ी इतनी तेज़ी और जोर से
वो भागा इतना सरपट बचने को उस खतरनाक भीड़ से
क्या जिन्दगी जीने का जज्बा बना देता है इतना मज़बूत अंदर से
सुना ही था ,पड़ा था किताबो में पर देखा आज आँखों से
4 टिप्पणियां:
NICE
जिजीविषा शक्ति और ऊर्जा ढूढ़ लाती है।
जीने की आशा...
प्रभावशाली प्रस्तुति |
बहुत सुन्दर प्रभावशाली रचना..
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