नवबालको का रुदन है .उनका क्रंदन है पर मन का कोना खाली है
बाल अठखेलियाँ हैं ,,मस्ती है हठ है पर मन का कोना खाली है
छायाहै सर्वत्र उल्लास , घर करता पाहुनों का इंतजार पर मन का कोना खाली है
यह कैसी लीला है उस प्रभु की ?कि मन का कोना शायद विधाता भरना भूल जाता है
हम जब हुई थी पैदा तो बताया कि बड़े होने पर खाव्ब होंगे पूरे
बड़े होने पर समझाया शादी के बाद ही बेटियां सपने पूरे करती हैं
विवाह के बाद पता चला माँ बनने के बाद ही नारी होती है सम्पूर्ण
तो न तो बचपन में मन का कोना भर पाया न ही युवावस्था में
यह ही है हकीकत हम सभी नारी जात की
यह ही है हकीकत हम सभी नारी जात की
6 टिप्पणियां:
Roshi ji aapke rachna me nari ki samajik avhelna ki vidmbna hai......sarthk lekhn .....
उल्लास मन में भरा रहे, खालीपन धीरे धीरे साथ छोड़ देगा।
सच कहा रोशिजी .....इस विडम्बना से हम सबको झूझना है ...झूझते आ रहे हैं ...!!!!
संवेदनशील रचना आभार
संवेदनशील रचना
जीवन में आशा और इच्छाएं आवश्यक हैं , निराशा से बाहर आना होगा !
शुभकामनायें आपको
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