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गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

भाग्य -सुख

हर कोई चाहता है आसमान से तारे तोड़ लायूं
पर विधाता ने यह सुख सबको नहीं है बांटा
कहीं अगर जाता विधाता इस बटवारे को करना भूल
तो यकीनन हम कर बैठते गगन को तारों से हीन समूल
बिरलों को ही दिया है उसने यह अधिकार अपने कर से
कुछ तो साथ देता है ईश प्रदत्त वरदान और कुछ संवारती है उसकी मेहनत
कुछ बदा होता है उसकी नियति में  और शायद कुछ उसके कर्मफल
शायद पिछले जन्म के पुण्य और पाप भी तय करते हैं उसका इस जन्म का लेखा -जोखा
अब अगर सब सितारें बैठें आपकी भाग्य -कुंडली में सही ठिकानो पर
तभी मिलता है सुख आपको आसमान से तारे तोड़ने का ,भाग्य चमकाने का