गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014

खुदा की नेमत


कभी रोना रोते रहे कि किस्मत नहीं साथ दे रही
कभी रोये सुनकर कि सेहत नहीं साथ दे रही
कभी रही तकलीफ कि हालत नहीं साथ दे रहे
कभी था रोना कि परिवार साथ नहीं दे रहा
पूरी उम्र निकाल दी रोते -रोते ,ईश्वर को कोसते -कोसते
कभी दायें -बाएं मुड़कर ना देखा ,जो था पाया उसको ना सराहा
उस ईश्वर ने जो दिया ,उसको हमेशा था ठुकराया
अब मौत का आ गया बुलावा दरवाज़े पर
तो था वो अब हमको खुदा याद आया 

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