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गुरुवार, 6 अगस्त 2015

Roshi: सावन

Roshi: सावन: सुना है हमने किसी को  कहते  कि सावन का महीना आ गया है पर हमने ना देखा गरजती -बरसती बदरिया, ना देखे नभ में घुमड़ते मेघ ना दीखी कोई ताल -तलई...

Roshi: सावन

Roshi: सावन: सुना है हमने किसी को  कहते  कि सावन का महीना आ गया है पर हमने ना देखा गरजती -बरसती बदरिया, ना देखे नभ में घुमड़ते मेघ ना दीखी कोई ताल -तलई...

Roshi: सावन

Roshi: सावन: सुना है हमने किसी को  कहते  कि सावन का महीना आ गया है पर हमने ना देखा गरजती -बरसती बदरिया, ना देखे नभ में घुमड़ते मेघ ना दीखी कोई ताल -तलई...

सावन

सुना है हमने किसी को  कहते  कि सावन का महीना आ गया है
पर हमने ना देखा गरजती -बरसती बदरिया, ना देखे नभ में घुमड़ते मेघ
ना दीखी कोई ताल -तलईया उफनते जल से ओतप्रोत
वन -उपवन में ना दीखी कोई नयी कोपलें ,वृक्षों पर ना कोई नव हरित वसन
बगिया सूनी ,डालें सूनी ,था ना कोई झूला  ,ना थे कोई सावन के गीत
ना देखी कोई विरहणी पिया मिलन को आतुर,सूख गए थे जैसे पपीहे के गीत
ना चूड़ी की कोई थी चनचन,ना पायल की कोई रुनझुन
शायद किसी सिरफिरे का रहा होगा कोई जूनून
उसी ने गली में फैलाया होगा कि आया है सावन