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मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

गिरगिट सरीखे रंग बदलना 
कबूतर मानिद आँख मूँद लेना 
गीध सी तेज नज़र ,बहुत कुछ है सीखना 
जिन्दगी जीना है अगर तो पड़ेगा जरूर सीखना 
लोमड़ी सी मौकापरस्ती ,इन जानवरों से सीखो जीना
देखे हैं हमने ढेरों पारंगत इन विविध कलाओं में
सीको दोस्तों इनसे कुछ बरना मुस्किल हो जायेगा जीना

7 टिप्‍पणियां:

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

नमस्ते, आपकी यह प्रस्तुति BLOG "पाँच लिंकों का आनंद"
( http://halchalwith5links.blogspot.in ) में
गुरूवार 21-12-2017 को प्रकाशनार्थ 888 वें अंक में सम्मिलित की गयी है। प्रातः 4:00 बजे के उपरान्त प्रकाशित अंक चर्चा हेतु उपलब्ध हो जायेगा।
चर्चा में शामिल होने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं, आइयेगा ज़रूर।
सधन्यवाद।

Ravindra Singh Yadav ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
अनीता लागुरी ने कहा…

जी . जीवन के प्रति सीख देतीआपकी रचना कमाल की उममाओ से प्रहद्वित प्रभावित करती है बधाई एवं शुभकामनाएं आपको।

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत खूब

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर

Nitu Thakur ने कहा…

लाजवाब

रेणु ने कहा…

आदरणीय रोशी जी -- बहुत ही व्यावहारिक संदेश मिला आपकी रचना में --सचमुच इन पशुवत गुणों के बिना एक सरल सहज इंसान का दुनिया में जीना कहाँ संभव है ? सादर सस्नेह शुभकामना आपको |