शिकायतें ,रिवायतें ,निभाते चले गए रस्मों ,
रिवाजों के मकड़जाल को सुलझाते चले गए
ना कुछ हासिल कर सके ,
ना ही कुछ बदल सके हम सब ही ढोल चाहे आ...
जिन्दगी बहुत बेशकीमती है ,उसका भरपूर लुफ्त उठाओ कल का पता नहीं तो आज ही क्योँ ना भरपूर दिल से जी लो जिन्दगी एक जुआ बन कर रह गयी है हर दिन ...
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