WATCH

शुक्रवार, 11 अक्तूबर 2019

संसारिक मर्यादा का तो बखूबी पालन किया मर्यादा पुरषोत्तम ने
पित्रधर्म ,माँ का सम्मान बखूबी निभाया था हर आज्ञा को राम ने
सौतेली माँ की आज्ञा को कर शिरोधार्य वन गमन का निर्ड्य लिया था राम ने
पिता का मान रखना तो पुत्र धर्म है ,पर भ्रात-सुता का न किया जरा ध्यान राम ने
कदापि ना विचारा लक्ष्मण की भगिनी कैसे काटेगी घोर वनबास ?
शूलों की मानिद उसको भी प्रतिदिन कटेगा रनिवास
रावण से युद्ध तो नियत विदित था पर उसमें सीता का क्या दोष था?
बलशाली रावण के द्वारा छल से ले जायी गयी वो श्रीलंका
एक -एक पल कैसे काटा उस पीड़ा को लिखना भी है मुश्किल
बापिस आकार भी तो वो गयी थी फिर छली,दूसरे पुरुष से
सुना दिया था निर्ड्य ,त्याग दी गयी थी मर्यादा पुरषोतम से
गर्भावस्था में भेज दी गयी वन में वो आसन्नप्रसवा
पतिधर्म की मर्यादा का पालन क्यौ ना कर सके तुम राम ?
हर युग में अनुत्तरित रेह जाएंगे कुछ सवाल
कभी न दे सकोगे उन प्रश्नों का जवाब तुम राम

1 टिप्पणी:

अनाम ने कहा…

प्रश्न तो बनते हैं