
झूलो की डोरी में
तुम याद बहुत आओगी
बारिश की फुहारों में
तृप्त करती बौछारों में
तुम याद बहुत आओगी
मेहंदी के बूटों में
रंग बिरंगे सूटो में
तुम याद बहुत आओगे
रंग बिरंगी चुनर में
लहंगे की घूमर में
तुम याद बहुत आओगी
मेघो की घन-घन में
पायल की छन-छन में
तुम याद बहुत आओगी
चमकती बिंदिया में
छनकती पायलिया में
तुम याद बहुत आएगी ..................
माँ ........
4 टिप्पणियां:
सावन में ही क्यों बेटी की याद तो हर मौसम में हर दिन आती है..बहुत ही प्रवाहपूर्ण भावमयी अभिव्यक्ति.
सुन्दर समां बांधा है ! भावपूर्ण रचना !
tum to kavitri ho gai . good rachna.
आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी......आपको फॉलो कर रहा हूँ |
कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
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