गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

गरीबी है सबसे बड़ी बीमारी



कल गई थीं चिकित्सक को दिखाने स्वयं का गला वहां
अचानक एक जर्जर काया वृद्ध सपत्निक आया था वहां 
वृद्ध ने लगभग रोते हुए डॉक्टर से था  फ़रमाया जरा 
कई दिन से डॉक्टर साहब कुछ ना खा पाया हूँ अन्न  जरा, दिल का हाल सुनाया  
वृद्धा भी विलाप कर रही थी और कह रही थी मनुहार 
ठीक से देखो जरा और कर दो उचित उपचार 
तभी हमारा माथा ठनका की है कुछ बड़े खतरे के आसार  
अम्मा कोई अगर है साथ में तो उसको बुलाओ यहाँ पर आज  
वृद्धा बोली  हम ही हैं जो भी हमें बताओ साफ़- साफ़  
माता जी खतरा है बड़ा, कैंसर से है पूरा गला भरा 
ले जाना चाहो तो करो बड़े शहर में जाकर बड़े डॉक्टर से बात 
 वृद्ध और उसकी पत्नी रह गए हक्के- बक्के एक साथ 
सुन वहीँ के वहीँ बैठे रह गए, उठ भी न सके एक साथ  
गले के कैंसर से भी बड़े कैंसर से जूझ रहे थे वे आज  
गरीबी, लाचारी, अकेलापन और भी थीं कई बीमारियाँ उनके साथ 
जो पहले से घेरेऔर जकड़े  थी उनको मजबूरी थी उनके  साथ 
इस कैंसर ने तो उन तकलीफों  में इजाफा  कर दिया हाथो - हाथ   
दिल्ली जाना और इलाज करवाना क्या हो सकेगा संभव उस वृद्ध दम्पति के पास  
शायद अब दिन बचे थे १० - १५ ही जीवन के अब उसके पास 
गरीबी का अभिशाप तो ना जीने देगा ज़िन्दगी के बचे कुछ दिन
लाचारी, बेबसी, गरीबी तो कैंसर से भी बड़ी बीमारी 

3 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत ही कारुणिक चित्र खींचा है आपने अपनी इस रचना में!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच में गरीबी से बड़ी कोई बीमारी नहीं।

Dr. Yogendra Pal ने कहा…

वाकई गरीबी से बड़ी को बीमारी नहीं है, बहुत मार्मिक लिखा है आपने


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