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शुक्रवार, 20 मई 2011

अर्धविझिप्त माँ

आज देखी एक अर्धविझिप्त माँ 
बच्चो को दुलारती- पुचकारती माँ 
दिमागी रूप से अविकसित पगली थी वो माँ 
पर ममता, प्यार कहीं भी न थे कम उसमे 
बच्चो की तरफ जैसे ही झपटा एक कुत्ता तत्काल ही उसने 
चंडी सा किया रूप धारण और भिड गई कुत्तो से वो माँ 
माँ तो माँ होती है , हों चाहें वो ठीक या हो पगली प्रतीत 
पर ईश्वर तो भर देता है कूट-कूटकर मातृत्व और बना देता है माँ 

11 टिप्‍पणियां:

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

माँ तो माँ होती है ...
बहुत सुन्दर एवं हृदयस्पर्शी रचना के लिए साधुवाद...

सुज्ञ ने कहा…

ममत्व का शिखर है यह रचना।

दिमाग का क्या है,
भले ले ले विराम।
ममता तो दिल में है,
वही करता है काम॥

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बच्चों के लिये माँ कुछ भी कर सकती है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

माँ का ममता से अटूट रिश्ता होता है!

रजनीश तिवारी ने कहा…

इस छोटी सी संस्मरण रूपी रचना में बहुत गहरे भाव हैं और मातृत्व का बहुत ही मार्मिक, हृदयस्पर्शी चित्रण है । धन्यवाद।

aditi ने कहा…

i am proud tht u r my mother...

madhu ने कहा…

maa apne bachcho ke liye ardhvishipt nahi vishipt hoti hai kyonki jab bhi uske bachcho ki baat hoti hai vo dimag se nahi sirf dil se kaam karti hai.Aur aajkal dil se kaam karne walo ko vishipt kaha jaata hai .Isliye maa ardhvishipt nahi vishipt hoti hai.

चैतन्य शर्मा ने कहा…

प्यारी कविता माँ से अच्छा कुछ भी नहीं......

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गहन अभिव्यक्ति है रोशीजी...... उत्कृष्ट रचना

डॉ मोनिका शर्मा

richa ने कहा…

great Roshi, you are going places!

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

हृदयस्पर्शी रचना .........

ललित शर्मा ने कहा…

माँ आखिर माँ होती है,
अपने बच्चे की खातिर वह मौत से लड़ जाती है.
सुन्दर भावाभिव्यक्ति
आभार