उनके वापिस जाने की वेदना जितना कर देती है बेचैन
जब तक कही दिल की बात और अपनों ने समझा हाले-दिल हमारा
तब तक वापसी का दिन आ गया और छूटा साथ हमारा
दिल में बहुत कुछ रह गया था बताने को पर अपने तो चले गए
करती रहती हूँ इंतजार महीना दर महीना वापिसी का जो है परदेश गए
समेटती, सहेजती रहती हूँ ढेरों बातें, किस्से बताने को हर बार उनके
इंतजार रहता है उस पल का जो गुजारने साथ आना है उनको

2 टिप्पणियां:
बहुत बढ़िया लिखा है आपने.
सादर
विछोह का मार्मिक वर्णन...
सुंदर भावाभिव्यक्ति.
एक टिप्पणी भेजें