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माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...
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रात का सन्नाटा था पसरा हुआ चाँद भी था अपने पुरे शबाब पर समुद्र की लहरें करती थी अठखेलियाँ पर मन पर न था उसका कुछ वश , न ही था दिमाग पर याद...
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देखी आज एक अर्धविझिप्त माँ बच्चो को दुलारती- पुचकारती माँ दिमागी रूप से अविकसित पगली थी वो माँ ममता, प्यार दुलार में किसी से भी कम ना थी ...
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आज हुई मुलाकात एक नवयुवती से जिसकी हुई थी अभी-अभी सगाई मुलाकात हुई उसकी काली-घनेरी फैली जुल्फों से ...
8 टिप्पणियां:
बहुत खूब।
sundar.
बहुत सुंदर सार्थक पंक्तियाँ,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
Sach hai.... Bahut Badhiya...
वाह. सुंदर.
बहुत ही सुंदर और सार्थक पंक्तियां...
आप मेरे ब्लॉग की 200वीं समर्थक है....
धन्यवाद.....
बिलकुल सच । सार्थक पंक्तियाँ ।
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