झिलमिल दीपकों की जगमगाहट, स्वर्णिम आभा से आलोकित,
बिखर गया है संपूर्ण उल्लास,कर रही है यह संपूर्ण धरा को प्रकाशित
मन है सबके प्रफ्फुलित, नई फसल, धन-धान्य से है धरा पूर्ण, सभी के मन हैं आनंदित,
शीतल वयार से मन को स्पंदित हैं , घर-आँगन में धरी रंगोली चौबारे भी भये सुवासित,
होगा अब त्यौहार पर होगा अपनों का आगमन ये ही सपना संजोये है हर मन.
रोशी अग्रवाल

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