गुरुवार, 3 नवंबर 2011

त्योंहरो का मौसम आया

त्योंहरो का मौसम, अदभुत भर देता है रोमांच
घर परिवार, वातावरण-सभी जगह होता है आनन्द ही आनन्द
 गर्मी से जब होती मुक्ति, शरीर, मस्तिस्क सभी होता है प्रफुल्लित 
साफ़ सफाई, साज श्रृंगार , नवीन वस्त्र  सभी करते आनंदित 
शादी, लग्न , उत्सवो की भी लग जाती है जैसे झड़ी  रोज घर बाहर 
सभी कर रहे थे इंतजार इस मौसम और आन्नद का हर बार  
दीपकों की अदभुत छठा, बिजली की लड़ी,पटाखों का शोर 
दिवाली के बाद घर आंगन करता बेटिओं का इंतजार 
जो आती होंगी दूर देश से समेट ह्रदय में भाइयों  का प्यार 
माँ बाप भी तक रहें है द्वार कि कब आएगी लाडली पूरण करने  त्योंहार.... 
                                                        रोशी अग्रवाल 



1 टिप्पणी:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

चमकते, दमकते दीपों का उत्सव।

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