रविवार, 23 जनवरी 2011
Roshi: दोस्ती
Roshi: दोस्ती: "कुछ सुख हर इंसा की किस्मत को नहीं होते नसीब पर इस सुख का हमने आनन्द उठाया है भरपूर और खूब आज जी हमारा चाहा कि हम इसको बाँटें सबसे..."
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जिन्दगी बहुत बेशकीमती है ,उसका भरपूर लुफ्त उठाओ कल का पता नहीं तो आज ही क्योँ ना भरपूर दिल से जी लो जिन्दगी एक जुआ बन कर रह गयी है हर दिन ...
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रात का सन्नाटा था पसरा हुआ चाँद भी था अपने पुरे शबाब पर समुद्र की लहरें करती थी अठखेलियाँ पर मन पर न था उसका कुछ बस यादें अच्छी बुरी न ल...
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