प्यासी धरती और झुलसता तन
शीतलता देता है बरसता सावन
हरियाली तीज आने को है सन्देश देता है यह सावन
दूर देश बैठी बेटी का आने को है बेक़रार मन
भैया को पीहर जाकर बांधुंगी राखी है यह बेचैन मन
जो न जा सकीं पीहर, ससुराल में हैं तड़पता उनका मन
माँ भी संजोती थी सपने और जोहती थी राह हर पल
आती होगी लाडो, झूलेगी झूला, रचेगी मेहंदी घर में होगा हल्ला गुल्ला
रोशी अग्रवाल

1 टिप्पणी:
सबको खुशियों रोज़ मिलें।
एक टिप्पणी भेजें