रविवार, 25 मई 2025

 

ना अल्लाह,ना राम ,ना रब ,ना यीशु ,ना ही श्याम
हर धर्म की खामियां दूंढने में मसरूफ है इंसान
इंसानियत का धर्म भूल हर धर्म को खंगालने में लगा पड़ा है इंसान
गर ध्यान से देखा ,समझा होता अपना धर्म यूँ ना खून बहाता इंसान
नेता ,धर्मगुरु निज स्वार्थ की खातिर विष बमन करके भड़काते इंसान
दुनिया भर में नफरत का सैलाब सिर्फ धर्म के नाम पर परोसा जा रहा है
निज नस्ल ,बिरादरी ,देश भुला कर सिर्फ धर्म के नाम पर शहीद इंसान हो रहा है
--रोशी

कोई टिप्पणी नहीं:

  तिनका -तिनका जोड़ चिड़ा-चिड़िया घरोंदा हैं बनाते हफ़्तों गुजार देते बारी-बारी अण्डों को सेने में वक़्त वो गुजारते मीलों उड़ान भर दाना चुग -चुग ह...