गुरुवार, 24 मई 2012

भूले बिसरे दिन

बिसर गए वो दिन जब सब भाई बहिन होते थे इकट्ठा
सुबह से होता था जी भरकर उधम ,और हंसीठठठा
ना कोई था समर कैंमप ,ना था होम वर्क का टनटा 
दिन भर थी बस हंसी -ठिठोली और था बस मस्ती का फनडा 
कहाँ गए वो दिन ,वो खिलखिलाहटों से चहकते घर आँगन 
सब कुछ भुला दिया इस जीवन की आपाधापी ने दिन -प्रति दिन 
काश हम लौटा लौटा  पाते   न न्हे नौनिहालो का मासूम बचपन 
जहाँ घुमते वो निर्द्वंद ,लेते भरपूर छुट्टी का वो भरपूर आनंद 
बर्फ का गोला .चुस्की और कच्ची कैरी के चटकारे बड़ा देते जीवन का रंग
कभी जाते थे छत पर ,और सोते थे खुली हवा में लेकर मच्छर दानी  का आनंद 
पर अब तो हो गयी सब भूली -बिसरी बातें  और ना रहे वो आनंद 

बुधवार, 23 मई 2012

देखा आज एक पूर्ण पल्लवित पलाश का एक वृक्ष अपने पूर...

देखा आज एक पूर्ण पल्लवित पलाश का एक वृक्ष
अपने पूरे यौवन ,पूरे शबाब के साथ खड़ा था वो 
अपनी पूर्ण विकसित शाखों को यूँ फेलाए  था वो 
जैसे लेने को आतुर हो प्रेयसी को अपनी बाँहों में 
तन पर लपेटे था वो पीत वसन की चादर चहुँ ओर 
रिझा रहा था वो अपने पीले पुष्प गिराकर अपनी प्रेयसी को 
हर कोशिश थी उसकी भरसक प्रेमिका को लुभाने की 
कभी देखा है ऐसा निशब्द प्रेमालाप किसी भी प्रेमी का 
जो बिन बोले ही सब कुछ कह देता है पूर्न मौन रहकर  

शनिवार, 12 मई 2012

ना कोई चिट्ठी .ना कोई संदेस पंहुचा सकते हैं हम वंह...


ना कोई चिट्ठी .ना कोई संदेस पंहुचा सकते हैं हम वंहा
चली गयी हो माँ आप हम को छोड़ कर जहाँ 
रोज़ रोता है दिल ,और तिल तिल-तिल मरते हैं हम यहाँ 
सोचा भी न था कभी ऐसा भी होगा हमारे साथ यहाँ 
जिंदगी में जैसे एक झंझावत आया और फैला सब यहाँ -वहां 
साडी दुनिया मना रही है मात्-दिवस हमारी नज़रे हैं सिर्फ वहां 
जहाँ आप जा बैठी हैं,क्यूँ नहीं हमसे मिल सकती हैं यहाँ ??????????????? 

गुरुवार, 10 मई 2012

कन्या भ्रूण हत्या है आजकल सबसे सनसनीखेज खबर पर जो ...



कन्या भ्रूण हत्या है आजकल सबसे सनसनीखेज खबर
पर जो रोज तिल -तिल मर रही उनकी न किसी को खबर 
लगता है विधाता ने उस जात की किस्मत में ही लिखा है मरना 
कुछ को पेट में ,कुछ को है बाहर आकर जलना और मरना 
होती हैं कुछ जो जीती हैं जिन्दगी पूरे मान और सम्मान से 
आमिर ने भी कन्या भ्रूण की तो बात की पूरी शान से 
पर रीना को वो भी छोड़ बैठे है जीने को पूरे अपमान से 

रविवार, 8 अप्रैल 2012

मन का कोना


संगीत है .स्वर बिखरे हैं ,कोलाहल है पर मन का कोना खाली है
शहनाई है ,बाजा है ,बारात है ,बाराती है पर मन का कोना खाली है
नवबालको का रुदन है .उनका क्रंदन है पर मन का कोना खाली है
बाल अठखेलियाँ  हैं ,,मस्ती है हठ है पर मन का कोना खाली है
छायाहै सर्वत्र उल्लास , घर करता पाहुनों का इंतजार पर मन का कोना खाली है
यह कैसी लीला है उस प्रभु की ?कि मन का कोना शायद विधाता भरना भूल जाता है
हम जब हुई थी पैदा तो बताया कि बड़े होने पर खाव्ब होंगे पूरे
बड़े होने पर समझाया शादी के बाद ही बेटियां सपने पूरे करती हैं
विवाह के बाद पता चला माँ बनने के बाद ही नारी होती है सम्पूर्ण
 तो न तो बचपन में मन का कोना भर पाया न ही युवावस्था में
यह ही है हकीकत हम सभी नारी जात की  

बुधवार, 4 अप्रैल 2012

जीने की आशा


जान अपनी कितनी होती है कीमती देखा कल निज आँखों से
पकड़ा था लोगो ने एक चोर को रंगे हाथ अपने हाथों से
कितना मार-मार कर किया था लहूलुहान लातों और घूंसों से
 मरंतुल ही लगभग हो चुका था वो इन्सान अपनी सांसो से
उस भीड़ में हर इन्सान ने लगभग हाथ साफ़ कर ही लिए थे
गूँज उठा तभी पुलिस van का सायरन कही दूर से
जरा सबकी नज़र हटी .और हो गयी पकड़ ढीली उस चोर से
उस मुर्दा शरीर में जान पड़ी इतनी तेज़ी और जोर से
वो भागा इतना सरपट बचने को उस खतरनाक भीड़ से
क्या जिन्दगी  जीने का जज्बा बना देता है इतना मज़बूत अंदर से
सुना ही था ,पड़ा था किताबो में पर देखा आज आँखों से  

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

टूटते रिश्ते


जीवन के है अद्भुत रूप और विचित्र रंग
आज किसी का साथ और कल दुसरे का संग
ना है रत्ती भर उनको साथ छोड़ने का गम
बरसों की दोस्ती बस यूं ही भुला दी पाने को किसी और का संग
वो सारे लम्हे जो थे बांटे साथ बैठ कर एक संग
एक पल में ही उड़ा दी सारी धज्जियाँ रूई की मानिद
ना रखे कुछ भी अपने पास मीठे एहसासों का संग  

  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...