गुरुवार, 28 जुलाई 2022

 ज़िंदगी का सफर दिखा जाता है रोज़ नए रंग

प्रतिदिन ज़िंदगी के सफे पर दिखते हैं अद्भुत रंग
चोरी ,गलती पकड़ी जाने पर चेहरे का पड़ता शफ़्फाक रंग
गिरगिट को पीछे छोड़ चुके इन्सानों का हर छड़ बदलते रंग
दुल्हन -दूल्हे के लाल होते चेहरों का लालित्य पूर्ण रंग
बालक को चॉकलेट थमाते उसके खिले चेहरे का अद्भुत रंग
पीड़ा -गम से लबरेज इंसान की काया का पड़ता पीला रंग
नवयुवती की आँखों के बदलते रंगों का भी होता अलग रंग
युवक के आसमां को छू लेने के सपनों का भी दिखता है अलग रंग
परीक्षा हाल में जाते विद्यार्थी के चेहरे पर बदलते ,उड़े -उड़े रंग
सीमा पर जाते सैनिक के जोश -हौसले का होता अद्भुत रंग
हर रंग कुछ ना कुछ कहता ,बयां कर जाता हमसे अपनी कहानी
हर रंग की होती अपनी जुबां,खामोशी से दिखा जाता अपनी रवानी
रोशी --
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Suman Gupta, Poonam Agarwal and 7 others
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 हरियाला सावन आया ,फिज़ा में हरितमा साथ लाया

बाग -बगीचे हरे हुए ,चहुं ओर हरा रंग बिखरा पाया
काले घने मेघ छाए ,धरती ने शीतल जल है पाया
पीपल की डार पर पड़े झूले ,सावन के गीतों ने माहौल सजाया
कंही सजते तीज के सिंधारे पिया मिलन ने सजनी को तड़पाया
चूड़ी -मेहंदी के रंगो ने है सखियों की नींद है को खूब उड़ाया
जिनके प्रियतम बसे परदेस उनकी दशा को कवि भी ना बखान पाया
भोले बाबा की जय -जयकार से हर शिवालय गुंजारित ,बम -बम भोले लहराया
हर जगह दिखते कांवरथी ,अद्भुत जोश ,भोले का उद्घोष फिजाँ में है समाया
तप्त काया पर जब पड़ती शीतल बूंद उस एहसास को ना कोई बखान पाया
प्यासे पपीहे की आकुलता जब सावन की बदरी करती तृप्त कोई जान ना पाया
इस अनोखे सावन का मज़ा जिसने चखा ,वो ही इसका बखान दिल से कर पाया
रोशी -
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Neelu Singh, Sweaty Agarwal and 2 others

 बुजुर्गों वास्ते रोज़ नए बनते वृद्धाश्रमों की देश में बड़ती गिनती

हमारी पीड़ी पर है बदनुमा दाग वजह सम्मलित परिवार की रोज़ है घटती गिनती
कभी हम नहीं सोचते उनके कष्ट ,तकलीफ जो उठाए थे हमारे सुख वास्ते उन्होने
एक झटके से बाहर निकाल दिया उनको ज़िंदगी से अपनी ,घर से उनके अपनों ने
दो घड़ी भी बैठकर उनका सुख -दुख क्या कभी सांझा किया था कभी हमने ?
दो वक़्त की रोटी,एक कमरा देकर इतिश्री कर ली थी अपनी जिम्मेदारियो की सदेव हमने
कभी दो घड़ी का समय था क्या हमारे पास ? उनके साथ बैठकर हंसने ,कहकहे लगाने का
गिरती सेहत ,मानसिक दशा ,की तरफ तो कभी तवज्जो ही ना थी हमारी, वक़्त ना था सोचने का
जिन बुजुर्गों ने पूरी ज़िंदगी झोंक दी, हमको इस मुकाम तक पहुंचाने में ,उनका हर पल हमारा था
हमसे शुरू होकर उनकी दुनियाँ हमारे इर्द -गिर्द थी, पर हमको अब उनका साथ ना गवारा था
एक पल ना सोचते हम कि क्या संस्कार दे रहे अपने बुजुर्गों को भेज कर वृद्धाश्रम
जो बोएँग-वही काटेंगे श्रष्टि का यही नियम है बच्चे समय से पहले ही भेज देंगे

गुरुवार, 14 जुलाई 2022

 

सावन की बदरी ने भी शुरू कर दिया है पक्षपात
जिधर नहीं है जरूरत बरस रही बेलगाम ,कर रही बेहाल
घनघोर गर्जन ,तड़कती बिजली कर रही अद्भुत प्रहार
जन -जीवन बेहाल ,बाड़ का प्रकोप सर्वत्र जीवन बदहाल
कंही है भयंकर सूखा ,ना है कहीं बारिश की बूंद का भी हाल
त्राहि -त्राहि छाई सर्वत्र पशु -पक्षी भी व्याकुल सभी हुए बदहाल
हे इन्द्र देव कर दो हम पर भी कृपा -दृष्टि ,सब हैं बेहाल
कुछ जल बरसा कर ,ताप से मुक्ति दो ,सबका जीवन हुआ बदहाल
रोशी --
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गुरुवार, 30 जून 2022

 सावन की पहली फुहार कर जाती मन हर्षित हर बार

मिट्टी की सोंधी खुशबू बिखर जाती फिज़ा में हर बार
अंगार सरीखी धरा पर जब पड़ती पहली बौछार एक बार
तप्त तवे को जैसे जल की बूंद करती शीतल हर बार
खेत -खलिहान हुलस पड़ते जब उन पर गिरती प्रथम बौछार
सम्पूर्ण धरा जो रही थी झुलस ,निखर उठती पाकर शीतल वयार
नर -नारी ,पशु -पक्षी सब थे व्याकुल बरसते अंगारों से
खिल उठे सबके चेहरे सावन के पहले -पहले छींटों से
रोशी--
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सोमवार, 27 जून 2022

 ज़िंदगी में क्यूँ इतनी भागम-भाग हो गयी है

सूर्योदय के साथ ही रोज़ दिखती सरेआम है
बालक स्कूल,ट्यूशन और,माँ-बाप दफ्तर जा रहे हैं
बुजुर्ग पार्क जा रहे ,कर्मचारी काम पर जा रहे हैं
किधर भी नज़र ना आता ,बैठा कोई भी सुकून से
कोई भी,बतियाता ,हँसता -खिलखिलाता दिखता ना सुकून से
यह जिंदगी का मंज़र दिखता है रोज़मर्रा में सभी को यकीन से
कुछ पल अपने लिए गुजार लो बेफिक्री से..क्या मालूम कल मिले ना मिले तुमको नसीब से
अपनी खुशी के लिए भी बचा कर रखो नित कुछ लम्हे ,जिन पर हक़ हो सिर्फ तुम्हारा ही पूरी शिद्दत से

रोशी --

रविवार, 26 जून 2022

 आजकल हर इंसान में उबासी ,निद्रा दिन में भी दिखती है

रात्रि ज़्यादातर हर किसी की सोशल -मीडिया के सहारे ही कटती है
कार्य -छमता कम और ज़िंदगी ऊलजलूल हरकतों में ही कटती है
बच्चे -बूड़े सब हो रहे अभ्यस्त सबकी इसके साथ छनती है
जो रहते इससे दूर कामयाबी उनके साथ चलती ही है
दोष देते हैं बड़ी आसानी से किस्मत को ,अपनी गलती नहीं दिखती है
जब जागोगे रात भर उल्लू की मानिद,तो जीवन का लक्ष्य क्या पाओगे ?
बुजुर्गों के अनुसार जीवन जियो ,कामयाबी के परचम लहराओगे

रोशी--

  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...