प्रेम, प्यार, इश्क, मोहब्बत पर क्या लिखें आज?
हमारे ग्रन्थ, शास्त्र, गीत, कहानी और ढेरो उपन्यास
सभी करते हैं गुणगान दीवानगी और बताते है प्रेम में पागल इंसान
पर क्या इस प्रेम, प्यार, मोहब्बत जैसे शब्दों की व्याख्या कर पाया है कोई?. सबने ज़्यादातर इसको परिभाषित किया, नर नारी की दिलजोई
कभी न जाना असली मर्म, सच्चा अर्थ, इन सुन्दर लफ़्ज़ों के पीछे.
प्रेम के तो अगणित हैं रूप, रंग और अंदाज़ सभी हैं अद्वितीय और अनोखे
माँ का बालक से प्रेम , गुरु का शिष्य से निर्मल स्नेह ,
भक्त काआराध्य से प्रेम, सेवक का स्वामी से प्रेम.
प्रेम के नित नए रूप, नए रंग, नवीन विषय, नव प्रसंग.
मीरा का कान्हा से प्रेम, राधा और कृष्ण का अद्भुत प्रेम,
केवट का राम से प्रेम, सीता का पति प्रेम. भरत का भाई प्रेम.
हमारे जीवन में हैं अद्भुत प्रेम. उन्नत, उत्कृष्ट रूपों में,
जिनको है न कोई ग्रन्थ, इतिहास, काल, है समेट पाया अपने पन्नों में
रोशी अग्रवाल





