शनिवार, 26 मार्च 2022

 हमारे बीच कितने अनमोल सितारे हैं छुपे

पड़ गयी गर नज़र तो बाहर आ जाते हुनर छुपे
किसी को मिल जाती मनमाफिक मंज़िल तुरंत
कोई तो बेचारा ज़िंदगी भर ऐड़िया रह जाता घिसे
किस्मत ,मेहनत ,तजुरबा सब की है अहमियत इस रेस में
कछुआ तो पहले भी हरा चुका है खरगोश को रेस में
ढेरों सचिन ,लता ,साइना छुपी हैं कंही ना कंही इस माशरे में
ना जाने कब किसकी नज़र पड़ जाए उनको तराशने में
पैदा तो हर कोई होता है भीतर समेटे अपने अनोखी प्रतिभा के साथ
बस किस्मत है आपकी कब नजरे इनायत हो जाए ईश्वर की आपके साथ
रोशी --
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शुक्रवार, 25 मार्च 2022

 लोग क्या कहेंगे? सरीखा जुमला बचपन से ही सुनते आए

ना बचपन में इससे पल्ला छूटा ,ना अब तक इससे दूर हो पाये
अपने बच्चों के साथ भी यही जुमला यदा -कदा इस्तेमाल करते आए
क्यौ इतनी की जमाने की फिक्र कि अपनी शकसियत ही ना पहचान पाये
खुद के लिए ना जी कर जमाने कि खुशियाँ ही सदेव तलाशते आए
ज़िंदगी के इस पड़ाव पर आकर यह जाना कि यह भी कोई जीना है
अपने वजूद से ज्यादा दुनिया को खुश करना है ,नकली मुखोटा लगा कर रहना है
अपने भीतर झाँको नकली-आवरण उखाड़ डालो और बच्चों को भी यही सिखाना है
सत्कर्म करते रहो ,उच्च विचार और नेक राह पर ईमानदारी से चलना है
लोग क्या कहेंगे? इस चक्रव्यूह में ना ऊलझ कर बेखौफ जीवन जीना है
रोशी --
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गुरुवार, 24 मार्च 2022

 यह दिल जैसी चीज़ भी खुदा ने खूब बनाई है

बड़ी -बड़ी दुश्वारियाँ झेल जाता है बड़े ही सुकून से
हल्की सी ठेस से चटख जाता है ,झट से ,चटाख से
इसका रिमोट होता है दिमाग में ,जिसमें सारी शैतानी ,हैवानियत भरी है
दिल तो बहुत कोमल ,नाज़ुक बनाया है खुदा ने ,गलती सारी दिमाग की ही है
बदनामी तो बेचारे दिल की होती है दिमाग तो पर्दे के पीछे ही सदेव रहता है
निष्कर्ष यह है कि संगत हमेशा उच्च रखो ,अपनी सहूलियत खुद परखो
जितने दुष -परिड़ाम हुए हैं उनका जिम्मेदार बेचारा यह दिल कदापि ना होता
फैसला गर खुद किया होता तो दिल इतना रुसवा ना हुआ होता ......
रोशी --
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सोमवार, 14 मार्च 2022

 बचपन से अगर सिखाया जाए सच और झूठ का फर्क ,ज्ञान ,गलत और सही

तो भावी जीवन कितना बेहतरीन हो सकता है ,सोचने की फुर्सत नहीं
माँ-बाप इतने व्यस्त हैं भौतिक जीवन में ,संस्कारों के लिए वक़्त नहीं
स्कूल -ट्यूशन लगा ज़िम्मेदारी निभाते ,बालक के साथ बैठने का वक़्त नहीं
जैसे साँचे में डालो मिट्टी आकार ले लेती है ,पर उसके लिए भी वक़्त नहीं
फिर कहते हैं आजकल बच्चे बिगड़ गए ,कुछ सुनते नहीं ,मानते नहीं फिर
जब हमको बचपन में वक़्त देना था ,तो दिया नहीं ,आज उनके पास समय नहीं
हमारा फर्ज़ पूरा करने में हमने कोताही बरती ,इस शिकायत के हम हकदार नहीं
रोशी --
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रविवार, 13 मार्च 2022

 

होली का आया त्योहार ,जो संग ले आता है कुछ नए धमाल
जीजा समझे साली को आधी घरवाली ,भाभी भी करे देवर संग कमाल
सबको मिले मौका अपनी को छोड़ पड़ोसन को समझे घरवाली
अनुकूल मौका ,भंग की तरंग सभी हुये अपने रंग में मस्त खेलने में होली
दादा -दादी पर चडा प्यार का अद्भुत रंग ,एक दूजे को रंग रहे बेखौफ मस्ती से
आँख की रोशनी ,काँपती काया साथ नहीं दे रहे ,आज उनको लाज नहीं जमाने से
नई नवेली घूँघट की ओट से निहार रही प्रीतम को ,रंग से सरोबार करने को बैचैन
होली का पर्व है अनूठा जो प्रिया प्रीतम सबको मौका देता जो था करने को मन बेचैन
रोशी --
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