शुक्रवार, 11 मार्च 2022

 

अगर हौसला हो बुलंद तो दुश्मन भी टेक देता है घुटने अपने
डट कर करो गर सामना तो दुश्मन के भी टूट जाते हैं जीत के सपने
जिस भांति उकरेन के सैनिक डटे हैं रूस के विरुद्ध,दिखा दी बहादुरी अपनी
एक उढाहरण पेश किया ,कि डरो नहीं अपने रण-कौशल से जीतो जंग अपनी
आखिरी दम तक करो मुकाबला कर लो जीत को मुट्ठी में अपनी
रोशी --

Richa Mittal

गुरुवार, 10 मार्च 2022

 बासन्ती बयार ,फाल्गुनी फुहार आ ही गया रंगो का त्योहार

बगिया में अमुआ पर है छाया बौर ,कोयल के स्वर है गूँजा चहुं- ओर
गुलाल की खुशबू ने फिज़ाओं में भरने रंग कर दिये शुरू हर ओर
घर की रसोई महकी है गुझिया ,समोसे और ढेर से पकवानो की खुशबू से
कंही बच्चों की भगदड़ है मची नए वस्त्रों,जूते ,चप्पल की ख़रीदारी से
मेहमानों के स्वागत की तैयारी ,रंग ,पिचकारी से गूँजा है घर का आँगन
हर कोई व्यस्त है अपने -अपने हिसाब से बूढ़े-बच्चे हो या हो जवान
विचित्र है बहुत यह त्योहार क्यौंकी पुराने गिले-शिकवे भी करवा देता कुर्बान
गुलाल और रंग के छींटे भुला देते हैं बरसों के झगड़े,कर देते सबको एकसमान
चाहे हो मौसम का असर ,या होली की मस्ती सब ओर छाया है मस्ती का आलम
लाता है बदलाव हमारे जीवन की आपा -धापी में,फैला देता है मस्ती का शबाब

रोशी--

मंगलवार, 8 मार्च 2022

 महिला दिवस के वास्ते पूरे वर्ष में सिर्फ एक दिन रखते हैं हम साल के 364 दिन भी हैं इसके वास्ते बहुत ही कम

नारी के हैं असंख्य रूप इसकी गड़ना भी है नामुमकिन
कभी दुर्गा ,कभी शीतला ,बन जाती है झाँसी की रानी कई दिन
माँ ,बहन ,पत्नी ,दोस्त ,बेटी जैसे अनेकों किरदार निभाती है यह प्रतिदिन
बिना किसी गिला-शिकवा हर रूप को दिल से अंजाम तक पंहुचाती है हर दिन
बेजोड़ कृति है यह ईश्वर की ,इठलाया तो खुद खुदा भी होगा इसको बनाकर
नारी के ममता ,प्रेम ,त्याग ,बलिदान की ढेरों मिसालों से रोशन है इतिहास हमारा
अपनी अस्मिता ,चरित्र ,शील -स्वभाव की रक्षा करना अब है दायित्व तुम्हारा
आधुनिकता में रंगकर अपने अस्तित्व की मर्यादा को सम्हालना है फर्ज़ तुम्हारा
रोशी--
May be an image of one or more people and text that says 'happy WOMEN'S day'
Harjeet Rekhi

सोमवार, 7 मार्च 2022

 शिक्षा,संस्कार ,माहौल ,यह सब मिलकर भी बदल सकते हैं व्यवहार

तब्दीली ला सकते हैं कुछ सिखा सकते हैं कुछ आचार -व्यवहार
पर जन्मजात अवगुण तो रहते हैं साथ सदा ,चाहे पड़ा लो उनको कितने पुराण
कंस ,रावण ,दुर्योधन सदा घिरे रहे सतपुरशों से ,भगवान थे सदा जिनके साथ
महापुराण पड़कर भी ज्ञानी रावण ना त्याग सका अपना घमंड और अभिमान
दुर्योधन को समझाते रहे सदेव गुरुजन ,माता गांधारी और सभी भाई, परिजन
कंस जैसे पापी को भी ना बदल सका बहन ,बहनोई ,माता -पिता का ज्ञान
मति-भ्रषट,अहंकार सरीखे अवगुण से किया सम्पूर्ण विनाश मिटाई अपनी शान
ज्ञान ,सत्संग, ने गर बदला होता स्वभाव ,तो इतिहास में होती कुछ और ही शान

रोशी --

रविवार, 6 मार्च 2022

मुश्किलें कितनी भी आयें कर्म करते रहो
भले ही डगर कितनी कंटीली हो शांत भाव से चलते रहो
जब लगे घिरे हो गहन अंधकार में पर रोशनी को ढूंढते रहो
धैर्य ,संयम का दामन कस कर थामे रहो मजबूती से पकड़े रहो
करिश्मे जरूर होते हैं ,बेखौफ अपनी राह पर चलते रहो
खुश रहो ,सकारात्मक्ता फैलाते रहो ,निराशा की धुंध में ना बहको
किनारा तो तूफान में फंसी किश्ती को भी मिलता जरूर है बस पतवार थामे रहो
अवसाद ,निराशा को तनिक दिलो -दिमाग पर हावी ना होने दो दोस्तों ,अपना प्रयास जारी रखो
देर- सबेर कामयाबी चूमेगी आपके कदम बस कभी मिलती कुछ अरसे में कभी गुजर जाते हैं बरसों
--रोशी

मंगलवार, 1 मार्च 2022

 क्यौ कर हम लगे हैं खुद को सर्वश्रेस्ठ सिद्ध करने में ?

एक लम्हे को भी कदापि ना सोचते इस दौड़ को रोकने में
अपनी सीमाओं ,छेत्र विस्तार ,पराए देश को हड़पने जैसी तुच्छ हरकतों में
झोंक देते हैं सारी ताकत ,राष्ट्रिए संपदा ,सैनिक ,बालक और जवानों को इसमें
बदले में क्या मिलता है ?अनाथ बच्चे ,विधवाएँ ,खंडहरऔर सर्वत्र विनाश को
देखकर भी ना आत्मा है सिसकती ,ना है कसम खाते इस मंजर को दुहराने को
कमजोर मछ्ली को जैसे हड़पने को रहते हैं तैयार मगर जल में हर -पल सदेव
ऐटमी बम ,मिज़ाइलें ,तोपें ,गोला बारूद सबके पास है तैयार उसी भांति सदेव
जिधर चाहा मुख मोड़ दिया अत्याधुनिक जखीरे का , कमजोर भर आ जाए नज़र
यह कदापि ना सोचा कि हिरोशमा-नागासाकी की तबाही का खामियाजा नस्लें भुगत रही है आज तक ,हम भी ना जबाब दे सकेंगे उस तबाही का कभी कर
हम परमाडु-बम छोड़ेंगे तो हमारे राष्ट्र ,हमारी नस्लें सब को भी भुगतना होगा इसका दुश -परीड़ाम बरसों तक
आज भले ही कब्जा कर लें एक मामूली जमीन के टुकड़े पर ,देना होगा इसका जबाब सालो-साल बरसों तक
रोशी --

सोमवार, 28 फ़रवरी 2022

 जीवन जीने की विधा इसकी कला ना समझ पाया हर कोई

बड़े -बड़े ऋषि भी ना पा सके इस कला की कभी गहराई
राजा द्रुपद ने किया यज्ञ लेने को अपमान का बदला
पुत्री द्रोप्दी ने तो था सारा इतिहास ही था बदला
सम्पूर्ण महाभारत ही बना कारण द्रोपड़ी के सिर्फ एक व्यंग का
क्यो हम ऐसे अपशब्द अनजाने ही कर जाते है इस्तेमाल
जो हृदय विदीर्ण कर जाते हैं ,आत्मा को कर जाते हैं घायल
बस एक लम्हा ही काफी होता है जिव्हा को सुमधुर वचन को
क्रोध के आवेग को सम्हालने में तो ऋषि -मुनि भी थे असमर्थ
जो इसमें हुए सक्षम वो इतिहास में कर गए अपना नाम दर्ज़
हो जाती है सबसे गलती ,बस जरूरत है स्वप्रयास की ,कोशिश में है ना कोई हर्ज़
रोशी

  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...