शनिवार, 15 जुलाई 2023

 कभी सोचा यह बरसते मेघ हमसे बहुत कुछ कहते हैं

जब बरसते हैं ,लरजते हैं सब कुछ दिल का कह जाते हैं
जब मेघ प्यार दिखाते हैं आसमां से बड़ी अदा से बरसते हैं
प्यार मोहब्बत दर्शाते हैं ,बिखराते हैं खुद से बरस -बरस कर
रोद्र रूप भी खुलेआम दिखाते हैं ,अपनी पीड़ा शायद बयां कर
तूफां भी लाते हैं अन्दर दबे हुए दर्द शायद सब एक साथ निकालकर
सुनामी भी शायद तकलीफों ,पीडाओं को व्यक्त करने का ही तरीका है
कभी महसूस कर के देखो शायद सब समझ आने लगेगा सच यही है
तेज हवायें भी बखूबी दोस्ती निभाती हैं मेघों के साथ ,पवन,मेघ का रिश्ता है पुराना
जब एक पीड़ा में होता है , दूजा साथ निभाता है ,परस्पर साथ निभाकर अपना
--रोशी
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गुरुवार, 13 जुलाई 2023

 सावन की रिमझिम फुहारें ,ताप से झुलसे मन को दे जाती चैन

हरितमा से पूर्ण प्रकृति की हरी चादर आँखों को देती शीतलताऔर सुकून
पपीहे की पुकार ,बूंदों की फुहार भिगो देती है अंतर्मन भीतर तक
माटी की सौंधी खुशबू बिखर जाती है भरपूर फिजां में दूर -दूर तक
झूले पर बेटियां ,लहराती चुनरियाँ ,खनकती चूड़ियाँ उकेर रही दृश्य बेहतरीन
सावन के गीत,ढोलक की थाप बिखेर रहे अद्भुत स्वर,बना रहे माहौल रंगीन
लहरिया ,बंधेज तो छा ही जाता है सर्वत्र ,चुनरी ,साड़ी ,लहंगा दिखता हर ओर
हरे वस्त्रों की जैसे आ जाती बाड़ , हरितमा छा जाती बहुतायत में चहुँ ओर
कवियों ने विविध भांति बखाना है इस मास को अनेकों प्रकार अपनी कविताओं में
थाह ना कोई पा सका है सावन की मस्ती ,सुकून ,आनंद की अपने अपने जीवन में
गर्म तवे पर ज्यों जल की बूँद छड मात्र दे जाती शीतलता का एहसास तप्त तवे को
सावन की फुहारें भिगो जाती तप्त ह्रदय को तवे सरीखा ,मिल जाती ठंडक तन को
--रोशी

मंगलवार, 13 जून 2023

 चाहे बिच्छु हो या हो सर्प ,फितरत होती एक समान

पाया है कुदरतन जो जन्मजात ,है न कोई उसमें भरम
कोई ना छोड़ते मौका जहर उगलने का मौका जब भी मिलता
ज्यूँ साधू देता प्रवचन सदेव चाहे कितनी विषम परिस्थिति में उलझता
प्रेम का पाठ पडाना ही होता है उसका जन्मजात स्वभाव सदेव
बदले कभी फितरत दोनों की अमृत हो या जहर उगलने की
रखना याद हमेशा मरते दम तक भी लेश मात्र छोड़ ना सके आदतें खुद की
-रोशी
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सोमवार, 12 जून 2023

 घर सूना ,आँगन सूना ,और सारा चौबारा

बच्चों की चुलबुलाहट से है सूना घर सारा
धमा -चौकड़ी ,भागदौड़ से रहता घर गुलजार
कभी लड़ाई ,कभी ठहाके रौनक बढ़ाते घर की हर बार
बेटियां आती कुछ पल गुजारने मायके छुट्टियों में हर बार
याद आती उनको भी अपनी गृहस्थी बस कुछ दिन यूं ही गुजार
नानियाँ चाहती है सदेव की बच्चे सकुशल लौटें वापिस अपने घर बार
May be a doodle of 4 people, people smiling and text that says 'HAPPINESS IS VISITING NANI KA GHAR'
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बुधवार, 17 मई 2023

 ख़ुशी कुछ देर और तकलीफें क्यूँ ज्यादा टिकती हैं

हम स्वयं इसके जिम्मेदार खुद -बा खुद होते हैं
ख़ुशी के पल संजोने में कोताही करते हैं
ग़मों को सीने के अंदर दफ़न कर लेते हैं
गर झटक दें दिल दिमाग से कुछ पल में
जो चैन से तनिक हमको जीने ना देते हैं
रोम रोम से ख़ुशी का इज़हार करते हैं
परेशानियों का दिमाग में बसेरा कर बैठते हैं
अनिद्रा ,तनाव के शिकार हो मरीज़ बन जाते हैं
ख़ुशी में निरोग ,मस्त काया हम सब पाते हैं
जीवन में क्या बेहतर है चुनना हमको है
जिसने समझ लिया वो ही निरोगी काया पाते हैं
रोशी
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गुरुवार, 11 मई 2023

 जितनी नफासतऔर मोहब्बत चुनाव के दौरान होती है काश सदेव होती

जितनी खामियां प्रत्याशी कोचुनाव के दौरान हैं दिखती काश सदेव दिखतीं
बस्ती ,गली ,मोहल्ला है बेजार रहता पूरे साल ,सब पर उनकी नज़र है जाती
अव्यवस्था ,तकलीफें आम आदमी की दिमाग में कभी ना प्रत्याशी के आतीं
चुनाव आते ही हर तरफ नज़र जाती है सबकी और करते हैं सुधारने का वादा
सट्टा के मद में सब भूल बैठतें हैं की क्या किया था उन्होंने जनता से वायदा
हम देख समझ कर चुनते हैं अपना प्रतिनिधि पूरी उम्मीदों ,आशाओं के साथ
गर समझ लें सब अपनी जिम्मेदारी समाज के प्रति तो मिलेगा हमको पूरा इंसाफ
रोशी

मंगलवार, 9 मई 2023

 सूर्य का ताप जला रहा है हर इंसान को

एक तो स्वतः ही विश्व जल रहा है विध्वंस से
युद्ध की विभीषिका कई देशों को जला रही है
उधर आसमां से बरसते आग के शोले तडपा रहे हैं
पडोसी देशों में अराजकता विश्व को दहला रही है
बम,रासायनिक हथियार रही सही कसर पूरी कर रहे हैं
जिन्दगी इतनी तकलीफदेह हो गई है ,हर कोई है लाचार
कोरोना और बीमारियों ने कर दिया है जीवन बेज़ार
क्योँ इतना पारा मौसम ,विश्व के अनेकों देशों का बड़ा हुआ है
खुदा करे रहम आसमां ,दिल ,दिमाग सर्वत्र ताप घटा दे
रोशी

  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...