सोमवार, 25 सितंबर 2023

 सुख के पीछे पीछे भागते छोड़ बैठते हैं कुछ अनमोल पल

शायद इससे बेहतर कुछ मिले इस चाह में गँवा बैठते हैं सब
जितना मिले समेट लो दामन में अपने तो रहोगे सदेव खुश
यह मृग मरीचका तो ऋषि मुनियों को भी दौड़ाती रही है बरसों से
अतृप्त ,असंतुष्ट तो रहा है मानव सदेव आदिकाल से
कुछ बेहतर पाने में ही गँवा बैठता है पूर्ण सांसारिक सुख
विधना ने जन्म के साथ ही कुंडली में लिख भेजे सुख -दुःख
शांत भाव से जियो जिन्दगी, नियति को स्वीकार रहो सदेव खुश
--रोशी
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 क्योँ बेटियों को उनका अपना मुकम्मल जहाँ मयस्सर ना होता है ?

बचपन में उसके दिलो -दिमाग में बैठा दिया जाता है ,पराये घर जाना है
शायद रस्मों -रिवाज़ ,घर -रसोई सीखने मात्र में बचपन गुजर जाता है
घर की देहरी के भीतर उसका बचपन घोंट और कुचल दिया जाता है
क्या सही क्या गलत का पाठ उसको जवानी तक भरपूर पड़ाया जाता है
घूमने पर रोक -टोक ,खाने पीने पर पाबन्दी का पाठ उसको रटाया जाता है
पीहर में हर पल उसको अहसास कराया जाता है की पराये घर जाना है
दिल -दिमाग में बेटियां बैठा लेती हैं की ससुराल अब उनका अपना घर होगा
उफ़,, विदा होते ही ससुराल में उनको दूजा पाठ सुनाया जाता है
ससुराल पति का कहलाया जाता है ,बेटी को नए सबक को फिर दुहराना पड़ता है
बेटियों जिन्दगी भर ना समझ पाती,पीहर या ससुराल कौन सा घर अपना होता है ?
--रोशी
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 हंस कर काटी गर जिन्दगी साथ में ढेरों मिल जायेंगे

आंख में अश्कों को देख सब दूर हो जायेंगे
मुस्कराता चेहरा भाता है सबको ,हाल चाल सब पूछने आएंगे
गर खोला हाले दिल का पिटारा ,सब झूटी तस्सलियाँ दे मन बहलाएँगे
कोई जख्मों पर ना लगाएगा मरहम,ज्यादातर नमक ही छिड़क कर जायेंगे
कब ,कैसे ,किसके साथ बांटना है तकलीफों का जखीरा बस यह हुनर सीख लो
नकली मुखौटे के साथ जीने की पड़ गई है आदत ,वही सबको खुश कर पाएंगे
फायदा है बड़ा इसका ना अपने दर्द दिखेंगे ना दूसरे के गम हम देख पाएंगे
--रोशी
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मंगलवार, 8 अगस्त 2023

 मुखौटे चडे हैं चेहरों पर ,पहचानना है नामुमकिन

गर मुखौटा हटा कर देखो हर चेहरा मुस्कराता दिखेगा यक़ीनन
बड़े से बड़े शूरवीर भी खा गए धोखा असल नक़ल को जानने में
उम्र निकल जाती है तमाम, असलियत की गहराई समझने में
असलियत सामने आते -आते खुद हो जाते तमाम जिन्दगी में
हर रोज़ कोई नया मुखौटा सामने आ जाता इस जिन्दगी की दौड़ में
--रोशी
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रविवार, 6 अगस्त 2023

 मित्र दिवस पर कुछ उदगार

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मित्र होते हैं बड़ी हसीन बला ,इनका क्या बखान किया जाए ?
बिन कुंडली मिलाये तमाम जिन्दगी जो रिश्ता बाखूबी रिश्ता निभाए
अकेलेपन का ना होने दे एहसास हर रिश्ते का किरदार सदेव निभाए
मित्र होते हैं बड़ी हसीन बला ,इनका क्या बखान किया जाए ?
जब रोने का जी करे आँखों को देखते ही झट से समझ जाए
माहोल को झट पलटा दे अश्रु भी नैनो का रास्ता भूल जाए
मित्र होते हैं बड़ी हसीन बला ,इनका क्या बखान किया जाए ?
हर उलझन ,पीड़ा का हल होता इनके पास ,तत्काल दे सुलझाये
जुबा तक बात आने से पहले ही हर समस्या का हल जेब में साथ रख कर लाये
मित्र होते हैं बड़ी हसीन बला ,इनका क्या बखान किया जाए ?
चेहरा देख पड़ लेते हाले -दिल पता नहीं यह जादू कहाँ से सीख कर आये ?
सुख -दुःख में होते शामिल बिंदास सब झट से यह हैं जान जाए
निभाते हैं यह अटूट रिश्ता दिलो -जान से बदले की ना कभी आस यह लगाये
मित्र होते हैं बड़ी हसीन बला ,इनका क्या बखान किया जाए ?
गर बताना पड़े दिल का मजबून तो वो क्या ही दोस्त कहलाये ?
--रोशी
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बुधवार, 26 जुलाई 2023

 माँ का स्पर्श होता जादुई तिलिस्म औलाद के वास्ते जन्म से

चंद लम्हों में ही पा जाती औलाद सम्पूर्ण सुख दुनिया के
माँ के आंचल में सिमटी होती बालक की छोटी सी दुनिया जिसमें
हाथ पोंछना हो या आंसू ,सब कुछ पा जाता हक से वो खुद ही इसमें
चंद सिक्के हों या हो टाफी बांध लेती खज़ाना छोर पर आँचल के
भूखी ,प्यासी खुद रहकर मां बांध लेती सुनहले सपने बालक के
जादू भी अनोखा जानती है मां बाखूबी ,नहीं है दुनिया में कोई इसका सानी
हर उलझन ,समस्या औलाद की तड़प जान जाती बिन बोले यह दीवानी
यूँ ही सर्वोच्च स्थान मां को नहीं गया है नवाज़ा ,होती है अद्भुत गुणों की खान
औलाद की खातिर प्राणों की आहुति देने में चूकते ना कभी पशु ,पक्षी और इंसान
--रोशी

मंगलवार, 25 जुलाई 2023

 

लरजते,बरसते मेघ बरसा रहे यदा कदा शीतल फुहार
तन -मन का मिटे ताप ,प्रकृति ने ओडी हरितमा की चादर
कोयल की कूक ,पपीहे का गान, गूँज उठे सभी खेत खलिहान
तृप्त धरा हुई परिपोषित ,झूम उठे सम्पूर्ण खेतों के धान
मौसम ने बदला माहौल नाच उठे मयूर वन -उपवन में
फिजां में गूँज उठे गीत सावन के ,ढोलक की थाप गूंजे घर आँगन में
घूमर ,नृत्यों से सज गयीं महफिलें ,लहंगा चुनरी छायी सब अंगनो में
सजनी खडी ड्योडी पर राह तके प्रियतम की ,आया मस्त सावन सजीला
क्यूँ गए पिया परदेस सावन में ,वयां न कर सके अलबेली सखियों संग अपनी पीड़ा
--रोशी
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  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...