शनिवार, 4 जनवरी 2025



 गरीब ,बेसहारा इंसान हो या जानवर सर्द रात काटना है दूभर
विकट परिस्थिति में कैसे सांसे बरक़रार रखना है कोई इनसे सीखे
हीटर ,अंगीठी से भी जब हड्डियाँ हैं कडकडाती ,यह बेचारे कैसे जीते
सुबह का सूरज तो नसीब वालों को है मिलता ,गर रह गए वो जिन्दा
पूस की सर्द रात इंसान और जानवर दोनों को पड़ती है जिन्दगी पर भारी
नितांत तकलीफदेह होती है शीत लहर ,गुजरती है यह सब पर भारी
लू के थपेड़े इतना ना देते कष्ट, रूह को ना सताते ना होती तकलीफ सारी
--रोशी

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