मकर संक्रांति के बाद मौसम का परिवर्तन निश्चित है
ग्रहों की दिशा का बदलाव होता है शास्त्रों के अनुसार ,पक्का है
इस बरस शायद कुछ भूल -चूक हो गयी है ईश्वर के खाते में
शीत लहर का प्रकोप कम होता ना दिख रहा इस मौसम में
कोहरा छटने का नाम नहीं ले रहा,कहर बरपा दिया इस मौसम में
त्राहि -त्राहि मच गयी है हाड़ गलाने वाली शीत लहर से सर्वत्र
सृष्टि काँप उठी है इस भयानक त्रासदी से,रहम मांगते हाथ जोड़कर
--रोशी
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