माँ,आपको गए पच्चीस बरस हो गए ,हम आपको आज भी महसूस करते हैं
घर के हर कोने में है आपका वजूद ,आपकी खुशबू आज भी महसूस करते हैं
रसोई में ,आँगन में ,फुलवारी में, छत में ,चौबारे में हर कोने में है आपका अस्तित्व
साड़ी में आती है आपकी खुशबू ,कानों में गूंजती है आपकी आवाजें भरपूर
मां के बगैर घर अधूरा लगता है ,मां जैसा लाड़-दुलार दुनिया में कंही ना मिलता है
मां से माएका शब्द उपजा है जीवन के आवागमन का दुःख सबके हिस्से आता है
--रोशी
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