अपने मनमुताबिक चाहते हैं कि बच्चे चलें
उचित है यह, पर उनको अपने डग भरने दो
कब तक पकडे रहोगे डोर अपने हाथ में
खुले आकाश में उनको भी कभी उड़ने दो
तजुर्बा सिखाएगा कितनी और कैसे उड़न भरनी है
गिद्धों ,चीलों से बचना खुद सीखने दो ,पंख पसारना आयेगा
गर चलाते रहे हाथ थामकर तो धरती के शिकारिओं से कौन बचाएगा
--रोशी
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