सोमवार, 15 जुलाई 2024


 जीवन की आपाधापी में भूल गए खुद का बजूद और निज ख़ुशी                                                                                 सब को खुश रखने में भूल बैठे अपनी खुद की जिन्दगी और हंसी
ताक पर रख दिए थे अपने शौक ,मस्ती ,इच्छाएं ,सपने और जीवन के रंग
दुछत्ती से उतर झाडा उनको और भर डाले बहुरंगी उनमे विभिन्न रंग
दुनिया की गलतियों पर राख डालते रहे ,जीवन भर रहे खुद दुश्वारियों के संग
जीवन का गडित देर में समझ आया ,अपने कैनवास में भरने होंगें खुद ही रंग
--रोशी

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