जिन छड़ों को हम समेट कर रखना चाहते हैं दिल से
छोड़ जाते हैं अमिट ,अद्भुत यादें मस्तिस्क में बेहतरीन
गुजर जाते हैं कई दिन उन यादों के सहारे बेहतरीन
दिल लौट जाता है खुद बा खुद उन लम्हों की ओर
मजबूर है यह बस बेशकीमती यादों को समेटता है
--रोशी
जिन्दगी बहुत बेशकीमती है ,उसका भरपूर लुफ्त उठाओ कल का पता नहीं तो आज ही क्योँ ना भरपूर दिल से जी लो जिन्दगी एक जुआ बन कर रह गयी है हर दिन ...
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