जिन छड़ों को हम समेट कर रखना चाहते हैं दिल से
छोड़ जाते हैं अमिट ,अद्भुत यादें मस्तिस्क में बेहतरीन
गुजर जाते हैं कई दिन उन यादों के सहारे बेहतरीन
दिल लौट जाता है खुद बा खुद उन लम्हों की ओर
मजबूर है यह बस बेशकीमती यादों को समेटता है
--रोशी
तिनका -तिनका जोड़ चिड़ा-चिड़िया घरोंदा हैं बनाते हफ़्तों गुजार देते बारी-बारी अण्डों को सेने में वक़्त वो गुजारते मीलों उड़ान भर दाना चुग -चुग ह...
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