सोमवार, 15 जुलाई 2024


 गूंजते थे जब ठहाके बच्चों के ,धमाचौकड़ी की आवाजें                                                                                           लगती थी अच्छी कानों और दिल को वो प्यारी आवाजें
आंगन गुलज़ार रहता था उनकी भागादौड़ी ,शैतानियों से
आगे -पीछे दौड़ते ,कब दिन ढल जाता इतनी शीघ्रता से
बदलाव होता बहुत जरूरी जिन्दगी के रोज़मर्रा ढर्रे से
जिन्दगी में रंग भर जाते नए कुछ वक़्त अपनों के साथ गुजारने से
--रोशी

कोई टिप्पणी नहीं:

  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...