सोमवार, 15 जुलाई 2024


 सोचते हैं जैसा जिन्दगी का बहाव न होता वैसा पूरे जीवन                                                                                    बचपन से ही प्रतिस्पर्धा का हो जाता जीवन में चुपचाप आगमन
घर में ,खेल में ,जीवन में चलती यह निरंतर जीवन भर
शायद हमारा व्यक्तित्व भी ढल जाता जिन्दगी भर उसी अनुसार
गर मिल जाए रूप,बुद्धी ,कद -काठी औरों से ज्यादा अहं आ जाता जन्म से ही
कुदरतन कमी से व्यक्तित्व का विकास जमींदोज़ हो जाता बचपन से ही
सामान्य बचपन जीवन की गति को रखता सदेव धरातल से जोड़कर
जिन्दगी है जन्म से मृत्यु तक वर्ना बहुत ही मुश्किल कभी देखो सोचकर
रोशी

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